चैतन्य शर्मा

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मैं चैतन्य एक बहुत अच्छा बच्चा हूँ | मैं 9 साल का हूँ | मुझे ड्राइंग-कलरिंग करना बहुत पसंद है | मैं क्लास V में पढ़ता हूँ और माँ को कभी परेशान नहीं करता | मुझे डांस करना बेहद पसंद है | स्कूल में मुझे सब बहुत पसंद करते हैं | यह ब्लॉग 5 साल पहले मेरी माँ डॉ. मोनिका शर्मा ने बनाया था । अब मैं खुद अपने पोस्ट ब्लॉग पर शेयर करता हूँ । इस ब्लॉग पर मैं अपनी सारी बातें शेयर करूंगा |

Monday, December 13, 2010

मेरी फोटोग्राफी...!

फोटोग्राफी भी एक आर्ट है सबको नहीं आती , लेकिन मैंने फोटो  क्लिक करना  सीख लिया है | यह  हो  सकता है कि आपको मेरी खिची गयी फोटोस जल्दी से समझ ना आयें पर  थोड़ा  ध्यान से देखेंगें तो कोई ना कोई एंगल ज़रूर ठीक लगेगा |

मेरे जैसे आर्टिस्ट के लिए फोटो खींचना कोई आसान काम नहीं है | बहुत मेहनत करनी पड़ती है | बड़ी मुश्किल से रूठने जिद करने पर तो कैमरा मिलता है | फिर जितनी  देर फोटोग्राफी करता हूं ममा पापा टोकाटाकी करते रहते हैं | बहुत डिस्टर्ब होता है |  फिर भी , जब भी  मौका  मिलता है फोटो क्लिक कर ही लेता हूं......



दरवाज़ा है और दीवार भी.... कैसा है ...?
रिमोट का फोटो भी ज़रूरी..... यह दूर बैठे कई काम करता है....

कारपेट है जी ..... टेक्स्चेर  को भी  स्टडी कर सकते हैं....
मेरा राइटिंग बोर्ड, फेवरेट कार्टून और टॉय बॉक्स......
घर के हर कोने की फोटो ज़रूरी है.....
टेबल है जी..... वुडन टेक्सचर  स्टडी कर सकते हैं.....
ध्यान से देखिये ... खाली चेयर नहीं है... मेरा टॉय डिएगो बैठा है ......

 वैसे तो मैंने इस तरह के अनगिनत फोटो क्लिक कर  लिए हैं पर आपके लिए इतना ही....... वरना  पोस्ट थोड़ी ज्यादा ही आर्टिस्टिक हो जाएगी :)
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एक  खास खबर यह कि कल मैं अपने देश (भारत ) जा  रहा  हूं यानि कि आ रहा हूं :)  |  क्रिसमस की छुट्टियों में  वहां खूब मस्ती करने और सबसे मिलने के लिए.....!  तो फिर मिलूँगा ..... आपसे नए साल में.....!

Monday, December 6, 2010

रंग बिरंगी तितलियाँ ...!

रंग-बिरंगे फूलों के साथ रहने वाली तितलियाँ भी बहुत सुंदर होती हैं  | तितलियाँ कई तरह की  और कई आकर की होती हैं | मुझे यह समझाने के लिए कुछ समय पहले मेरी एक खास क्लास लगाई गयी और मुझे बटरफ्लाई गार्डन ले जाया गया | वहां कई तरह  की  बटरफ्लाईज थीं | बहुत सुंदर और कलरफुल | मैंने सभी तितलियों को बहुत करीब से देखा | एक बार तो एक बटरफ्लाई मेरे हाथ पर भी आकर बैठी | ममा के हाथ पर तो कई बार तितली रानी आई और बैठ गयी | इनडोर बने इस बटरफ्लाई गार्डन में सभी तितलियाँ बहुत फ्रेंडली थी | मुझे तो तितलियों की यह रंग बिरंगी दुनिया बहुत अच्छी लगी ........... आप भी देखिये आपको भी ज़रूर पसंद आएंगी ......

कितनी सुंदर.......


आराम से बैठी यह तितली रानी.......



तीन रंगों से सजी सुंदर तितली ......
 

ये तितली वहां सबसे बड़ी थी ........ है ना थोड़ी अलग  


ममा के हाथ पर आई ...... बटरफ्लाई

ममा के हाथ पर दूसरी तितली .....



अरे ये फ्रूट्स भी खाती हैं......



इन्हें देखिये उड़ने को तैयार ..........




 और  फिर....... मेरी हथेली पर भी आई...... बटरफ्लाई ... 




Tuesday, November 30, 2010

डायेनासोर्स अलाइव....!

  कुछ दिन पहले ममा पापा मुझे जू लेकर गए | वहां सभी तरह के जानवर थे पर खास बात यह थी की वहां बहुत सारे डायेनासोर्स भी थे | वो भी अलाइव | मुझे तो इनके पास जाकर भी डर लग रहा था | फिर धीरे धीरे हिम्मत जुटाई | इतने बड़े बड़े डायेनासोर्स जंगल में जगह छुपे हुए थे | वहां इन डायेनासोर्स को अलाइव इसलिए कहा जाता  है क्योकि जैसे ही  कोई इनके पास जाता या इनके  सामने  से गुजरता तो जोर-जोर से इनकी डरावनी आवाज़ आने लगती | इनकी गर्दन हिलने लगती और ऐसा महसूस होता जैसे आप असली डायेनासोर्स  को देख रहे हों |         यानि कि जैसे  जीते -जागते  डायेनासोर्स आपके सामने  खड़े  हों  | वहां कई अलग अलग तरह के डायेनासोर्स  थे | सभी अलग अलग आवाज़ निकाल रहे थे | 
इन्हें देखिये कैसे छुप  के खड़े हैं....


यह है क्यूट  डायनासोर.......


इन्हें देखकर काफी डर लगा मुझे.....



यह देखिये ..... कूदने  को तैयार .....



इनका लुक है थोड़ा अलग ......




 अब देखिये .... लग रहे हैं ना असली .....


Thursday, November 18, 2010

हर तरफ...बर्फ ही बर्फ...!





अरे आप रुकिए.... जाइए नहीं ... यह मैं ही हूं चैतन्य | अभी-अभी स्कूल से आया हूं पर गाड़ी से बहार निकलने का मन नहीं कर रहा है क्योंकि चारों तरफ स्नो ही स्नो है | इस वक्त गाड़ी के बाहर का टेम्प्रेचर  -14 डिग्री है |   क्योंकि इस सीज़न की पहली स्नो आ पहुंची है |  अब कुछ महीने यहाँ ऐसा ही हाल रहेगा | मुझे भी आजकल बाहर निकलने से पहले पूरी तरह पैक होकर जाना पड़ता है | सुबह-सुबह स्कूल जाने में बड़ी दिक्कत आती है | सारे पेड़ पौधों पर बर्फ  जम गयी है | पैदल भी बहुत संभलकर चलना पड़ता है..... नहीं तो धपाक होते देर नहीं लगती | आप देखिये सीज़न की  पहली स्नो.......!
नहीं  आना  मुझे बाहर......

बहुत ठण्ड है रे ...


पेड़ों पर भी स्नो ही स्नो.....

देखिये बर्फ से ढकी है कार......


रास्ते के दोनों तरफ... बस बर्फ....



हर तरफ... जमी है स्नो....
बर्फ से ढके हैं क्रिसमस ट्री...


अब मैं अंदर भागता हूं.... बहुत ठण्ड लग रही है | आज के लिए इतना ही..... फिर से स्नो के सुंदर नज़ारे लाऊंगा आप सबके लिए..... अभी तो मैं भी जम रहा हूं....!


Saturday, November 13, 2010

सब उल्टा -पुल्टा लगता है....!

आज बाल दिवस है...... यानि हम बच्चों   का दिन.......मेरे सभी नन्हे दोस्तों को बाल दिवस की शुभकामनाएं...... मेरी इस बाल फोटो के साथ...............  


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मेरी पढाई की गाड़ी अब चल पड़ी है | काफी मेहनत करनी पड़ रही है | नम्बर्स और एल्फाबेट्स  को समझना और याद रखना मुझे थोड़ा  कन्फयूजिंग लग रहा है  | मुझे कुछ एल्फाबेट और नम्बर्स  उल्टे-पुल्टे लग रहे हैं | ममा पापा मेरे लिए बहुत सी बुक्स भी लेकर आये हैं जिनमें  नम्बर और एल्फाबेट बड़े सुंदर ढंग से समझाए गए हैं...... पर अभी तक तो मैं थोड़ा कन्फ्यूज़  हो रहा हूँ |

  1. नम्बर  7  मुझे अल्फाबेट L लग रहा है......
  2. अल्फाबेट M मुझे W  लगता  है......  पता नहीं क्यों.....
  3. नम्बर 4  मुझे अल्फाबेट A लग रहा है.... 
  4. जीरो मुझे अल्फाबेट O  लग रहा है.......
  5. सिक्स और नाइन में बड़ा कन्फ्यूजन है.... मेरी जगह बदलते ही ये भी बदल जाते है......



नम्बर सिक्स और नाइन में बड़ा कन्फ्यूजन है.......  :(


मैंने सीखा   A   लिखना........



कभी-कभी पेन अलग ही दिशा में घूम जाती है......

समस्याएं तो और भी बहुत आ रहीं हैं | आगे भी आपको बताता रहूँगा.....  पर अभी तक तो सब उल्टा-पुल्टा ही चल रहा है....... :(



Monday, November 8, 2010

सीखें कुछ नया नया...!

आजकल मेरा शेड्यूल थोड़ा बीजी हो गया है | मैं कई नयी नयी चीज़ें सीख रहा हूं | पिछले कई दिनों से ममा पापा दोनों ने मेरी क्लास लगा रखी है |  शाम के समय एक दिन मेरी कम्प्यूटर क्लास होती है और दूसरे दिन स्विमिंग क्लास | कम्प्यूटर टीचर ममा हैं और स्विमिंग कोच पापा | मुझे भी इन दोनों एक्टिविटीज में खूब मज़ा आ रहा है |


कम्प्यूटर क्लास में सब अच्छा चल रहा है | मुझे पेंट-ब्रश में सारे टूल्स इस्तेमाल करना आ गया है | कलर चेंज करने और कई तरह के शेप्स बनाने में बड़ा मज़ा आ रहा |  हाँ.... मुझे यह भी समझ आ गया है की कुछ गड़बड़ हो जाये तो Ctrl +Z दबाकर फिर से  ड्राइंग को ठीक कर सकते है | मैंने अपनी दिवाली की ड्राइंग भी पेंट-ब्रश में ही बनाई थी |

कुछ अच्छा बनाने की कोशिश है.....


बस अभी  हो जायेगा,......

इतने दिन हो गए..... कुछ चीज़ें अब भी भूल जाता हूं.....


स्विमिंग करने में भी खूब मज़ा आ रहा है | वैसे मेरी स्विमिंग क्लास तो काफी टाइम से चल रही है पर अभी मुझे ठीक से तैरना नहीं आता | मुझे पानी में जम्प करना बड़ा अच्छा लगता है |
पानी तो ठंडा है पर..... अब कूद ही गया तो ......?


पापा जैसी स्विमिंग कब आएगी मुझे....?

चलो कोशिश करता हूं......


अभी तो मेहनत करनी है......


 यह ड्राइंग जो मैंने आप सबके लिए बनाई है..... आप सबको थैंक यू कहने के लिए ..... मुझे इतना प्यार देने के लिए......

Wednesday, November 3, 2010

नन्हा दीपक....!



नन्हा दीपक कितना प्यारा
सबको देता है उजियारा

देखो उसकी हिम्मत कितनी
छोटा है पर सूरज जितनी

पूरा घर रौशन  करता है
ना वो अँधेरे से डरता है

भेदभाव ना उसको आये 
वो तो बस ज्योति फैलाये

हम दीपक जैसे बन जाएँ
उजला-उजला मन हो जाये 

संघर्ष की क्षमता पायें 
आलोकित उत्कर्ष जगाएं


 दीपक बन कर जलना सीखें
घोर तिमिर का नाश करें
हृदयाकाश आलोकित हो
ज्योतिर्मय  विश्वास  भरें


यह चित्र मैंने बनाया है... और नन्हे दोस्तों के लिए यह कविता मेरी ममा  ने लिखी है.....

Sunday, October 31, 2010

आया भूतों का त्योंहार.....!


 चारों  ओर भूतों , चुड़ेलों और  डरावने  चेहरों  का  डेरा ......  फिर चाहे घर हो या बाज़ार ..... स्कूल हो या मॉल......हर जगह एक ऐसे त्योंहार की धूम जिसमे डरने और डराने  का ही काम है | हेलोवीन एक ऐसा ही त्योंहार है जिसमे सब कुछ अजीबोगरीब सा  लगता  है | हर साल ३१ अत्तूबर को यह त्यौहार  मनाया जाता है जिसमे बच्चे और बड़े कई तरह के डरावने रूप धरते है | इतना ही घरों को भी डरावनी चीज़ों से सजाया जाता है  |  कद्दू  यानि की पम्पकिन का हेलोवीन के त्योंहार पर बड़ा महत्व होता है | घरो के दरवाज़े पर कद्दू को डरावने मुंह बनाकर सजाया जाता है | कई दिनों पहले से ही बाज़ार में  डरावनी  कॉस्ट्यूम्स बिकने लगती हैं | बाज़ारों की सजावट भी  भूतों और डरावने आइटम्स से की जाती है |  मैंने भी यह त्योंहार मनाया और खूब एन्जॉय भी किया | सन्डे का दिन था इसलिए मैं माँ और पापा के साथ  मॉल भी घूमने गया वहां सभी लोग डरावने कॉस्ट्यूम्स पहनकर घूम रहे थे | इन सबके बीच  अजब  अनोखे ड्रेस  पहने   मेरे नन्हे मुन्हे दोस्त सबसे प्यारे लग रहे थे  और हाथों में बास्केट लिए चोकलेट्स बटोर रहे थे |



नन्ही परी...जो तितली  बनी  


यह छोटू भी अच्छा लगा मुझे....


यह दोनों तो सच में डरावने लग रहे हैं.....



सो स्वीट ना.....

इसे देखकर तो मैं बहुत डर गया था......

एक तरफ  चुडेल और दूसरी तरफ परी......


 छोटू जी भी निकले हैं...भंवरा बनकर...!



कितनी प्यारी.....तितली



घर के दरवाज़े पर सजे भूत चुडेल और पम्पकिन  
 

बाज़ार में सजे डरावने आइटम्स...
 




और मैं हूँ   स्पाइडर.....!
    क्या आपको मुझसे डर लगा... ? मैंने स्पाइडर बनकर सबको डराने की कोशिश की लेकिन  कोई  डरा ही नहीं......सब मुझे सो क्यूट.......  सो क्यूट..... कह रहे थे :(     पता नहीं क्यों....?
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